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गुरुवार, 29 नवंबर 2012

International SI system or method of measuring values


लम्बाई के मात्रक

मीटर-किग्रा.-सेकेण्ड पद्धति में लम्बाई का मात्रक 'मीटर' होता है। यह प्लेटिनम–इरीडियम मिश्रधातु की छड़ पर 0ºC पर बने दो चिह्नों के बीच की दूरी को 'मीटर' कहा जाता है। यह छड़ पेरिस के अंतर्राष्ट्रीय माप तौल के कार्यालय में रखी गई है। 1983 में, माप तौल के एक कॉन्फ्रेंस में 'मीटर' को पुनः परिभाषित किया गया। इसके अनुसार 'मीटर' वह लम्बाई है, जिसे प्रकाश निर्वात में 1/299792457 सेकेण्ड में तय करता है। एक अन्य परिभाषा के अनुसार एक मीटर वह दूरी है, जिसमें शुद्ध क्रिप्टॉन–86 से उत्सर्जित होने वाले नारंगी प्रकाश की 1,650,763,73 तरंगें आती हैं।
लम्बाई के प्रमुख मात्रक
मात्रकलम्बाई (मीटर में)मात्रकलम्बाई (मीटर में)
1 टेरामीटर (T)
10121 डेसीमीटर (d)10-1
1 गीगामीटर (G)1091 सेंटीमीटर (c)10-2
1 मेगामीटर (M)1061 मिलीमीटर (m)10-3
1 मिरियामीटर1041 माइक्रोन μ10-6
1 किलोमीटर (K)1031 मिली माइक्रोन mμ10-9
1 हेक्टोमीटर1021 एंग्ट्राम (Å)10-10
1 डेकामीटर101 पिकोमीटर (p)10-12
1 X–मात्रक10-13
1 फर्मीमीटर (f)10-15
1 आटोमीटर10-18
प्रकाश वर्ष- प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई दूरी को एक प्रकाश वर्ष कहते हैं। अतः प्रकाश वर्ष, दूरी का मात्रक है। प्रकाश द्वारा निर्वात में 1 वर्ष में चली गई दूरी 9.46×1015 मीटर होती है। अर्थात्-
1 प्रकाश वर्ष=9.46×1015 मीटर
खगोलिय इकाई- सूर्य व पृथ्वी के बीच की औसत दूरी को एक खगोलीय इकाई कहते हैं। पृथ्वी और सूर्य के बीच औसत दूरी 1.496×1011 मीटर होती है। अर्थात्-
1 खगोलीय इकाई=1.496×1011 मीटर
पारसेक- पारसेक 'Parallactic second' का संक्षिप्त रूप है। यह दूरी का मात्रक है। यह 1 सेकेण्ड चाप का लम्बन प्रदर्शित करता है।
1 पारसेक=3×1016 मीटर

द्रव्यमान के मात्रक

S.I. पद्धति में द्रव्यमान का मात्रक 'किग्रा.' है। पेरिस के पास सेवरेस नगर में अन्तर्राष्ट्रीय माप तौल के कार्यालय में रखे प्लेटिनम–इरीडियम मिश्र धातु के एक बेलन का द्रव्यमान 'मानक किग्रा.' माना जाता है।




द्रव्यमान के मात्रक
मात्रकद्रव्यमान
1 टेराग्राम109 किग्रा
1 जीगाग्राम106 किग्रा
1 मेगाग्राम103 किग्रा
1 टन103 किग्रा
1 क्विटंल102 किग्रा
1 पिकोग्राम10-15 किग्रा
1 मिलीग्राम10-6 किग्रा
1 डेसीग्राम10-4 किग्रा
1 स्लग10.57 किग्रा
1 मीट्रिक टन1000 किग्रा
1 आउन्स28.35 ग्राम
1 पाउंड16 आउन्स (453.52 ग्राम)
1 किग्रा2.205 पाउंड
1 कैरेट205.3 मिलीग्राम
1 मेगाग्राम1 टन
1 ग्राम10-3 किग्रा

समय के मात्रक

S.I. पद्धति में समय का मात्रक 'सेकेण्ड' होता है। एक मध्याह्न से दूसरे मध्याह्न के बीच की अवधि को सौर दिन कहा जाता है तथा पूरे वर्ष के 'सौर दिनों' के माध्य को 'माध्य सौर दिन' कहते हैं। इस माध्य सौर दिवस का 1/86400 भाग एक सेकेण्ड के बराबर होता है।
समय के मात्रक
मात्रकसमय
1 पिकोसेकेण्ड10-12 सेकेण्ड
1 नैनोसेकेण्ड10-9 सेकेण्ड
1 माइक्रोसेकेण्ड10-6 सेकेण्ड
1 माइक्रोसेकेण्ड1-3 सेकेण्ड

वैद्युत धारा का मात्रक

विद्युत धारा मात्रक ऐम्पियर है। ऐम्पियर वह विद्युत धारा है, जो निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर स्थित दो सीधे, लम्बे व समान्तर तारों में प्रवाहित होने पर, प्रत्येक तार की प्रति मीटर लम्बाई पर तारों के बीच 2×10-7 न्यूटन का बल उत्पन्न करती है।

ताप का मात्रक

ताप का मात्रक केल्विन है। सामान्य वायुमंडलीय दाब पर ग़लते बर्फ़ के ताप तथा जल के ताप के 100वें भाग को एक केल्विन (1 K) कहते हैं।

ज्योति तीव्रता का मात्रक

इसका मात्रक केन्डिला है। मानक स्रोत के खुले मुख के 1 सेमी2 क्षेत्रफल की ज्योति तीव्रता का 1/60वाँ भाग एक केन्डिला कहलाता है। जबकि स्रोत का ताप प्लेटिनम के गलनांक के बराबर हो।
इन सबको मूल राशियाँ कहते हैं। मूल राशियों के मात्रक एक–दूसरे से पृथक और स्वतंत्र होते हैं। साथ ही इन राशियों में से किसी एक को किसी अन्य मात्रकों में न तो बदला जा सकता है और न ही उससे सम्बन्धित किया जा सकता है। मूल राशियों के मात्रक को मूल मात्रक कहा जाता है। उपर्युक्त सात मूल भौतिक राशियों के अतिरिक्त दो पूरक मूल राशियाँ 'कोण' तथा 'घन कोण' भी होती हैं।

तलीय कोण का मात्रक

तलीय कोण का मात्रक रेडियन है। रेडियन वह कोण है, जो वृत्त की त्रिज्या के बराबर एक चाप, वृत्त के केन्द्र पर अन्तरित करता है।

घन कोण का मात्रक

घन कोण का मात्रक स्टेरेडियन है। 1 स्टेरेडियन वह घन कोण है, जो गोले के पृष्ठ का वह भाग जिसका क्षेत्रफल गोले की त्रिज्या के वर्ग के बराबर होता है, गोले के केन्द्र पर अन्तरित करता है।

राजस्थान की प्रमुख बोलियाँ


राजस्थान की प्रमुख बोलियाँ

भारत के अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में कई बोलियाँ बोली जाती हैं। वैसे तो समग्र राजस्थान में हिन्दी बोली का प्रचलन है लेकिन लोक-भाषाएँ जन सामान्य पर ज़्यादा प्रभाव डालती हैं। जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने राजस्थानी बोलियों के पारस्परिक संयोग एवं सम्बन्धों के विषय में वर्गीकरण किया है। ग्रियर्सन का वर्गीकरण इस प्रकार है :-
  • पश्चिमी राजस्थान में बोली जाने वाली बोलियाँ - मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढारकी, बीकानेरी, बाँगड़ी, शेखावटी, खेराड़ी, मोड़वाडी, देवड़ावाटी आदि।
  • उत्तर-पूर्वी राजस्थानी बोलियाँ - अहीरवाटी और मेवाती।
  • मध्य-पूर्वी राजस्थानी बोलियाँ - ढूँढाड़ी, तोरावाटी, जैपुरी, काटेड़ा, राजावाटी, अजमेरी, किशनगढ़, नागर चोल, हड़ौती।
  • दक्षिण-पूर्वी राजस्थान - रांगड़ी और सोंधवाड़ी
  • दक्षिण राजस्थानी बोलियाँ - निमाड़ी आदि।

बोलियाँ जहाँ बोली जाती हैं

मारवाड़ी



राजस्थान के पश्चिमी भाग में मुख्य रूप से मारवाड़ी बोली सर्वाधिक प्रयोग की जाती है। यह जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर और शेखावटी में बोली जाती है। यह शुद्ध रूप से जोधपुर क्षेत्र की बोली है।बाड़मेर, पाली, नागौर और जालौर ज़िलों में इस बोली का व्यापक प्रभाव है। मारवाड़ी बोली की कई उप-बोलियाँ भी हैं जिनमें ठटकी, थाली, बीकानेरी, बांगड़ी, शेखावटी, मेवाड़ी, खैराड़ी, सिरोही, गौड़वाडी, नागौरी, देवड़ावाटी आदि प्रमुख हैं। साहित्यिक मारवाड़ी को डिंगल कहते हैं। डिंगल साहित्यिक दृष्टि से सम्पन्न बोली है।

मेवाड़ी

यह बोली दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ ज़िलों में मुख्य रूप से बोली जाती है। इस बोली में मारवाड़ी के अनेक शब्दों का प्रयोग होता है। केवल ए और औ की ध्वनि के शब्द अधिक प्रयुक्त होते हैं।

बाँगड़ी

यह बोली डूंगरपूर व बाँसवाड़ा तथा दक्षिणी-पश्चिमी उदयपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में बोली जाती हैं। गुजरात की सीमा के समीप के क्षेत्रों में गुजराती-बाँगड़ी बोली का अधिक प्रचलन है। इस बोली की भाषागत विशेषताओं में च, छ, का, स, का है का प्रभाव अधिक है और भूतकाल की सहायक क्रिया 'था' के स्थान पर 'हतो' का प्रयोग किया जाता है।

धड़ौती

इस बोली का प्रयोग झालावाड़, कोटा, बूँदी ज़िलों तथा उदयपुर के पूर्वी भाग में अधिक होता है।

मेवाती

यह बोली राजस्थान के पूर्वी ज़िलों मुख्यतः अलवर, भरतपुर, धौलपुर और सवाई माधोपुर की करौली तहसील के पूर्वी भागों में बोली जाती है। ज़िलों के अन्य शेष भागों में ब्रजभाषा और बांगड़ी का मिश्रित रूप प्रचलन में है। मेवाती में कर्मकारक में 'लू' विभक्ति एवं भूतकाल में 'हा', 'हो', 'ही' सहायक क्रिया का प्रयोग होता है।

बृज

उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे भरतपुर, धौलपुर, दिल्ली और अलवर ज़िलों में यह बोली अधिक प्रचलित है।

मालवी

झालावाड़, कोटा और प्रतापगढ़ ज़िलों में मालवी बोली का प्रचलन है। यह भाग मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र के समीप है।

रांगड़ी

राजपूतों में प्रचलित मारवाड़ी और मालवी के सम्मिश्रण से बनी यह बोली राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में बोली जाती है।

ढूँढाती

राजस्थान के मध्य-पूर्व भाग में मुख्य रूप से जयपुर, किशनगढ़, अजमेर, टौंक के समीपवर्ती क्षेत्रों में ढूँढ़ाड़ी भाषा बोली जाती है। इसका प्रमुख उप-बोलियों में हाड़ौती, किशनगढ़ी, तोरावाटी, राजावाटी, अजमेरी, चौरासी, नागर, चौल आदि प्रमुख हैं। इस बोली में वर्तमान काल में 'छी', 'द्वौ', 'है' आदि शब्दों का प्रयोग अधिक होता है।

बुधवार, 28 नवंबर 2012

Rajasthan Current GK 2012

‎1. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, हेग (नीदरलैंड)के नवनिर्वाचित न्यायाधीश दलबीर भंडारी कहाँ के मूल निवासी है ?
Ans:- जोधपुर, राजस्थान के
2. राजस्थान में 15 सितम्बर, 2012 से शुरू होने वाली पशु गणना कौनसी पशु गणना होगी ?
Ans:- 19वीं पशु गणना
3. हाल ही में राजस्थान में मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर पर प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए द जोन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, बाल्टीमोर-अमेरिका एवं चिल्ड्रन इन्वेस्टमेंट फाउन्डेशन फण्ड के संयुक्त तत्वावधान में किस कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया है ?
Ans:- ‘‘ सुरक्षित शिशु जन्म हेतु परीक्षण सूची ’’ कार्यक्रम
4. राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड , जयपुर के अध्यक्ष पद पर किसे नियुक्त किया है ?
Ans:- बिजेन्द्र सिंह सूपाको
5. राजस्थान राज्य बीज निगम के अध्यक्ष किसे नियुक्त किया है ?
Ans:- धर्मेन्द्र राठौड को
6. 15 मई को राजस्थान के किस पूर्व मुख्यमंत्री की पुण्यतिथि मनाई जाती है ?
Ans:- स्व. भैरोंसिंह शेखावत
7. राजस्थान में किस जिलें में ग्रीन फील्ड अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा विकसित किया जायेगा ?
Ans:- अलवर जिले में
8. वह केंद्रीय उद्योग मंत्री, जो कि राजस्थान से ही राज्यसभा सांसद भी हैं ?
Ans:- आनन्द शर्मा
9. जयपुर का विश्व प्रसिद्ध बैंड, जिसे हाल ही में ओलम्पिक मशाल यात्रा-2012 में शामिल होने के लिए लन्दन रवाना किया गया है ?
Ans:- ’ कावा ब्रास बैंड ’ ( इस बैंड के कलाकार 1998 के विश्व कप फुटबाल और मेलबोर्न में 2006 में आयोजित कॉमनवेल्थ Games में भी अपनी प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। )
10. राजस्थानी की पहली ऐसी पत्रिका, जिसका हर अंक Online उपलब्ध है ?
Ans:- कथेसर (हनुमानगढ जिले से प्रकाशित होने वाली राजस्थानी तिमाही पत्रिका )
11. राज्य सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष किसे मनोनीत किया गया है ?
Ans:- श्री आर. डी. जावा को
12. राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष कौन है ?
Ans:- श्रीमती दीपक कालरा
13. किस प्रवासी राजस्थानी को प्रतिष्ठित ‘‘ भारत ज्योति ’’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है ?
Ans:- डॉ. धनपत लूनिया (चाडवास, चूरू ) - इन्होंनेहाल ही में दिल्ली हाट में आयोजित ‘‘पगडी बांधों’’ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है
14. राजीव गांधी पर्यावरणसंरक्षण पुरस्कार 2012 के लिए किस जिले की समिति का चयन किया गया है
Ans:- अलवर की शान्ति वन पर्यावरण संरक्षण समिति(रजि.) को
15. बालिका शिक्षा उन्नयन के लिए किस योजना के तहत बालिका छात्रावासों का निर्माण करवाया जा रहा है ?
Ans:- शारदे बालिका छात्रावास योजना






शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

Rivers Of Rajasthan

राजस्थान री नदियां



१) चम्बल नदी - 


इस नदी का प्राचीन नाम चर्मावती है। कुछ स्थानों पर इसे कामधेनु भी कहा जाता है। यह नदी मध्य प्रदेश के मऊ के दक्षिण में मानपुर के समीप जनापाव पहाड़ी (६१६ मीटर ऊँची) के विन्ध्यन कगारों के उत्तरी पार्श्व से निकलती है। अपने उदगम् स्थल से ३२५ किलोमीटर उत्तर दिशा की ओर एक लंबे संकीर्ण मार्ग से तीव्रगति से प्रवाहित होती हुई चौरासीगढ़ के समीप राजस्थान में प्रवेश करती है। यहां से कोटा तक लगभग ११३ किलोमीटर की दूरी एक गार्ज से बहकर तय करती है। चंबल नदी पर भैंस रोड़गढ़ के पास प्रख्यात चूलिया प्रपात है। यह नदी राजस्थान के कोटा, बून्दी, सवाई माधोपुर व धौलपुर जिलों में बहती हुई उत्तर-प्रदेश के इटावा जिले मुरादगंज स्थान में यमुना में मिल जाती है। यह राजस्थान की एक मात्र ऐसी नदी है जो सालोंभर बहती है। इस नदी पर गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज बांध बने हैं। ये बाँध सिंचाई तथा विद्युत ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं। चम्बल की प्रमुख सहायक नदियों में काली, सिन्ध, पार्वती, बनास, कुराई तथा बामनी है। इस नदी की कुल लंबाई 965 किलोमीटर है। यह राजस्थान में कुल ३७६ किलोमीटर तक बहती है। 

२) काली सिंध - 


यह चंबल की सहायक नदी है। इस नदी का उदगम् स्थल मध्य प्रदेश में देवास के निकट बागली गाँव है। कुध दूर मध्य प्रदेश में बहने के बाद यह राजस्थान के झालावाड़ और कोटा जिलों में बहती है। अंत में यह नोनेरा (बरण) गांव के पास चंबल नदी में मिल जाती है। इसकी कुल लंबाई २७८ किलोमीटर है। आहू, उजाड, नीवाज, परवन इसकी सहायक नदिया  है।

३) बनास नदी - 


बनास एक मात्र ऐसी नदी है जो संपूर्ण चक्र राजस्थान में ही पूरा करती है। बनअआस अर्थात बनास अर्थात (वन की आशा) के रुप में जानी जाने वाली यह नदी उदयपुर जिले के अरावली पर्वत श्रेणियों में कुंभलगढ़ के पास खमनौर की पहाड़ियों से निकलती है। यह नाथद्वारा, कंकरोली, राजसमंद और भीलवाड़ा जिले में बहती हुई टौंक, सवाई माधोपुर के पश्चात रामेश्वरम के नजदीक (सवाई माधोपुर) चंबल में गिर जाती है। इसकी लंबाई लगभग ४८० किलोमीटर है। इसकी सहायक नदियों में बेडच, कोठरी, मांसी, खारी, मुरेल व धुन्ध है। (i )बेडच नदी १९० किलोमीटर लंबी है तथा गोगंडा पहाड़ियों (उदयपुर) से निकलती है। (ii )कोठारी नदी उत्तरी राजसामंद जिले के दिवेर पहाड़ियों से निकलती है। यह १४५ किलोमीटर लंबी है तथा यह उदयपुर, भीलवाड़ा में बहती हुई बनास में मिल जाती है।(iii) खारी नदी ८० किलोमीटर लंबी है तथा राजसामंद के बिजराल की पहाड़ियों से निकलकर देवली (टौंक) के नजदीक बनास में मिल जाती है।







४) बाणगंगा - 


इस नदी का उदगम् स्थल जयपुर की वैराठ की पहाड़ियों से है। इसकी कुल लंबाई ३८० किलोमीटर है तथा यह सवाई माधोपुर, भरतपुर में बहती हुई अंत में फतेहा बाद (आगरा) के समीप यमुना में मिल जाती है। इस नदी पर रामगढ़ के पास एक बांध बनाकर जयपुर को पेय जल की आपूर्ति की जाती है। 

५) पार्वती नदी - 


यह चंबल की एक सहायक नदी है। इसका उदगम् स्थल मध्य प्रदेश के विंध्यन श्रेणी के पर्वतों से है तथा यह उत्तरी ढाल से बहती है। यह नदी करया हट (कोटा) स्थान के समीप राजस्थान में प्रवेश करती है और बून्दी जिले में बहती हुई चंबल में गिर जाती है। 

६) गंभीरी नदी - 


११० किलोमीटर लंबी यह नदी सवाई माधोपुर की पहाड़ियों से निकलकर करौली से बहती हुई भरतपुर से आगरा जिले में यमुना में गिर जाती है। 

७) लूनी नदी - 


यह नदी अजमेर के नाग पहाड़-पहाड़ियों से निकलकर नागौर की ओर बहती है। यह जोधपुर, बाड़मेर और जालौर में बहती हुई यह गुजरात में प्रवेश करती है। अंत में कच्छ की खाड़ी में गिर जाती है। लूनी नदी की कुल लंबाई ३२० किलोमीटर है। यह पूर्णत: मौसमी नदी है। बलोतरा तक इसका जल मीठा रहता है लेकिन आगे जाकर यह खारा होता जाता है। इस नदी में अरावली श्रृंखला के पश्चिमी ढाल से कई छोटी-छोटी जल धाराएँ, जैसे लालरी, गुहिया, बांड़ी, सुकरी जबाई, जोजरी और सागाई निकलकर लूनी नदी में मिल जाती है। इस नदी पर बिलाड़ा के निकट का बाँध सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है। 

८) मादी नदी - 


यह दक्षिण राजस्थान मुख्यत: बांसबाड़ा और डूंगरपुर जिले की मुख्य नदी है। यह मध्य प्रदेश के धार जिले में विंध्यांचल पर्वत के अममाऊ स्थान से निकलती है। उदगम् से उत्तर की ओर बहने के पश्चात् खाछू गांव (बांसबाड़ा) के निकट दक्षिणी राजस्थान में प्रवेश करती है। बांसबाड़ा और डूंगरपूर में बहती हुई यह नदी गुजरात में प्रवेश करती है। कुल ५७६ किलोमीटर बहने के पश्चात् यह खम्भात की खाड़ी में गिर जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में सोम, जाखम, अनास, चाप और मोरन है। इस नदी पर बांसबाड़ा जिले में माही बजाज सागर बांध बनाया गया है। 

९) धग्धर नदी - 


यह गंगानगर जिले की प्रमुख नदी है। यह नदी हिमालय पर्वत की शिवालिक श्रेणियों से शिमला के समीप कालका के पास से निकलती है। यह अंबाला, पटियाला और हिसार जिलों में बहती हुई राजस्थान के गंगानगर जिले में टिब्वी के समीप उत्तर-पूर्व दिशा में प्रवेश करती है। पूर्व में यह बीकानेर राज्य में बहती थी लेकिन अब यह हनुमानगढ़ के पश्चिम में लगभग ३ किलोमीटर दूर तक बहती है।
हनुमानगढ़ के पास भटनेर के मरुस्थलीय भाग में बहती हुई विलीन हो जाती है। इस नदी की कुल लंबाई ४६५ किलोमीटर है। इस नदी को प्राचीन सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है। 

१०) काकनी नदी - 


इस नदी को काकनेय तथा मसूरदी नाम से भी बुलाते है। यह नदी जैसलमेर से लगभग २७ किलोमीटर दूर दक्षिण में कोटरी गाँव से निकलती है। यह कुछ किलोमीटर प्रवाहित होने के उपरांत लुप्त हो जाती है। वर्षा अधिक होने पर यह काफी दूर तक बहती है। इसका पानी अंत में भुज झील में गिर जाता है। 

११) सोम नदी - 


उदयपुर जिले के बीछा मेड़ा स्थान से यह नदी निकलती है। प्रारंभ में यह दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती हुई डूंगरपूर की सीमा के साथ-साथ पूर्व में बहती हुई बेपेश्वर के निकट माही नदी से मिल जाती है। 

१२) जोखम - 


यह नदी सादड़ी के निकट से निकलती है। प्रतापगढ़ जिले में बहती हुई उदयपुर के धारियाबाद तहसील में प्रवेश करती है और सोम नदी से मिल जाती है। 

१३) साबरमती - 


यह गुजरात की मुख्य नदी है परंतु यह २९ किलोमीटर राजस्थान के उदयपुर जिले में बहती है। यह नदी पड़रारा, कुंभलगढ़ के निकट से निकलकर दक्षिण की ओर बहती है। इस नदी की कुल लंबाई ३१७ किलोमीटर है।

१४) काटली नदी - 


सीकर जिले के खंडेला पहाड़ियों से यह नदी निकलती है। यह मौसमी नदी है और तोरावाटी उच्च भूमि पर यह प्रवाहित होती है। यह उत्तर में सींकर व झुंझुनू में लगभग १०० किलोमीटर बहने के उपरांत चुरु जिले की सीमा के निकट अदृश्य हो जाती है।

१५) साबी नदी -


यह नदी जयपुर जिले के सेवर पहाड़ियों से निकलकर मानसू, बहरोड़, किशनगढ़, मंडावर व तिजारा तहसीलों में बहने के बाद गुडगाँव (हरियाणा) जिले के कुछ दूर प्रवाहित होने के बाद पटौदी के उत्तर में भूमिगत हो जाती है।

१६) मन्था नदी -


यह जयपुर जिले में मनोहरपुर के निकट से निकलकर अंत में सांभर झील में जा मिलती है।

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