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मंगलवार, 29 जनवरी 2013

Current Affairs GK 2013

                                                  Current Affairs GK 2013

                                                              Part - 1
                                                  
14 जनवरी
• राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2012 हेतु 50 लोगों का जीवन रक्षा पदक के लिए चयन किया.
• महिलाओं की ड्रेस व मोबाइल पर खाप पंचायतों का आदेश गैरकानूनी: सर्वोच्च न्यायालय.
• भारत की 64 वर्षीय मूर्तिकार जसू शिल्पी का अहमदाबाद में निधन.
15 जनवरी
• अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने मोहन बागान क्लब पर लगा 2 वर्ष का प्रतिबंध हटाया.
• राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राज्यों को वर्ष 2011-2012 हेतु कृषि कर्मण पुरस्कार प्रदान किए.
• बम्बई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 2 वर्ष बाद 20000 अंकों के पार.
16 जनवरी
• आंध्रप्रदेश सरकार ने विशेष चावल योजना-माना बियाम की शुरूआत की.
• टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने भारत में एसयूवी फॉर्च्यूनर का नया संस्करण लॉन्च किया.
• शिक्षक भर्ती घोटाला : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला सहित 55 दोषी करार.
17 जनवरी
• संसदीय समिति द्वारा 67 प्रतिशत जनसंख्या को 5 किलो अनाज रियायती दरों पर देने की सिफारिश.
• 11वां पुणे अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह पुणे में संपन्न.
• मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने एक वित्तवर्ष में सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेन्डरों की संख्या छह से बढ़ाकर नौ की.
18 जनवरी
• राष्ट्रपति ने केंद्र की सिफारिश को मंजूरी देते हुए झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किया.
• नीलामी रूट से कंपनियों के शेयरों की बोली लगाने वाले निकायों हेतु मार्जिन मनी की अनिवार्यता समाप्त.
19 जनवरी
• बिहार के पूर्व मंत्री और जनता दल यूनाइटेड के नेता रामाश्रय प्रसाद सिंह का गुडगांव में निधन.
• कांग्रेस पार्टी ने महासचिव राहुल गांधी को पार्टी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया.
• अनंत सुब्रम्ण्यन भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) के अध्यक्ष नियुक्त.
20 जनवरी
• 58वें आइडिया फिल्मफेयर अवार्ड में फिल्म कहानी हेतु विद्या बालन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार से सम्मानित.
• भारतीय टीम एकदिवसीय क्रिकेट रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर पहुंची.




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                                                       Part - 2


14 जनवरी
• चकां-दा-बाग (जम्मू-कश्मीर) में भारत-पाकिस्तान के मध्य फ्लैग मीटिंग सम्पन्न.
• भारतीय मूल की हलीमा याकूब सिंगापुर संसद की पहली महिला अध्यक्ष निर्वाचित.
15 जनवरी
• पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ की गिरफ्तारी का निर्देश.
• भारत ने अटारी-वाघा संयुक्त चौकी पर एक वीजा केंद्र खोला.
• भारत और वियतनाम ने सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्योगों के क्षेत्र में सहयोग के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए.
16 जनवरी
• भारत के सोमदेव देववर्मन पोलैंड के येर्जी यानोविच से पराजित होकर ऑस्ट्रेलियाई ओपन से बाहर.
• चीन के राजनियक वई वई को भारत में चीन का राजदूत नियुक्त किया गया.
• वर्ल्ड इन 2050 दी ब्रिक्स एंड बियोंड : प्रोस्पेक्ट्स, चैलेंजेज एंड अपॉच्युनिटीज रिपोर्ट जारी.
17 जनवरी
• भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने विश्व बैडमिंटन संघ की रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त किया.
• आईओसी ने साइक्लिस्ट लांस आर्मस्ट्रांग से वर्ष 2000 सिडनी ओलंपिक का कांस्य पदक वापस लिया.
• हॉकी इंडिया ने हॉलैंड के कोच रोलैंट ओल्टमेंस को हाई परफार्मेंस डायरेक्टर नियुक्त किया.
18 जनवरी
• ब्रिक्स देशों (ब्राजील,रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के मध्य आपसी हित के विभिन्न मुद्दों के बारे में अपने कर विभागों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति.
• हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड और ब्राजील की कंपनी नोवेलिस इंक के मध्य समझौता.
19 जनवरी
• विराट कोहली एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज 4000 रन बनाने वाले भारतीय बने.
• भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष प्रो यूआर राव को सैटेलाइट हाल ऑफ फेम सम्मान.
20 जनवरी
• बराक ओबामा ने अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली.
• जारी रिपोर्ट में भारत-चीन का द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2012-13 में 10.1 प्रतिशत घटकर 66.47 अरब डॉलर.
• 10वीं स्टैडंर्ड चार्टर्ड मुंबई मैराथन 2013 में पुरूषों का खिताब युगांडा के जैक्सन किपरॉप ने जीता.

गुरुवार, 24 जनवरी 2013

Current Affairs GK 2013


  1. सांसद गुरुदास कामत को वर्ष 2011 की जनगणना संपन्न कराने में योगदान हेतु सेंसस 2011 गोल्ड मेडल पुरस्कार के लिए चुना गया।
  2. 74वीं राष्ट्रीय टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2013 में पुरुष एकल का खिताब सौम्यजीत घोष ने जीता ।
  3. दिल्ली के शुभंकर शर्मा ने 112वीं टाटा स्टील अमेच्योर गोल्फ चैम्पियनशिप का खिताब जीता ।
  4. टेबल टेनिस खिलाड़ी सौम्यजीत घोष राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतने वाले भारत के सबसे युवा खिलाड़ी बने ।
  5. यूनेस्को द्वारा पश्चिमी घाट पर्वतीय श्रृंखला को संयुक्त राष्ट्र की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
  6. पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ की गिरफ्तारी का निर्देश दिये।
  7. भारत के सोमदेव देववर्मन पोलैंड के येर्जी यानोविच से पराजित होकर ऑस्ट्रेलियाई ओपन से बाहर हुए  ।
  8. विश्व आर्थिक फोरम 2013 हेतु भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता के रूप में केंद्रीय मंत्री कमलनाथ का चयन किया गया ।
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                                         Part -  2




  1. 4 जवनरी 2013 को ऑस्ट्रेलिया  के पूर्व तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्राथ को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के हाल ऑफ फेम में शामिल किया गया।
  2. प्रसिद्ध वायलिन वादन एमएस गोपालकृष्णन का 3 जनवरी 2013 को चेन्नई में निधन हो गया।
  3. 28-29 दिसंबर 2012 को भारत और म्यांमार के बीच राष्ट्रीय स्तर की 18वीं बैठक (दो दिवसीय) नई दिल्ली में सम्पन्न हुई।
  4. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री उर्जित पटेल को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में उप गवर्नर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
  5. केंद्र सरकार ने आरबीआई के पूर्व गवर्नर डॉ. वाईवी रेड्डी की अध्यक्षता में 14वें वित्त आयोग का गठन करने का निर्णय लिया गया।
  6. 9 जनवरी 2013 को पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी अनादि बरूआ को भारत की राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया।
  7. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुजरात सरकार के भूमि सुधार कानून 2011 को पारित करने के बाद स्वीकृति प्रदान की ।
  8. 9 जवनरी 2013 को तालिबान के खिलाफ देश के संघर्ष का प्रतीक बनी  पाकिस्तान की किशोरी मलाला यूसुफजई को फ्रांस के सिमोन डी बेवॉर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  9. 9 जनवरी 2013 को भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के अत्याधुनिक संस्करण (एस फॉर्म) का सफल परीक्षण किया , यह भारत का 34 वां सफल परीक्षण रहा।
  10. भारतीय फिल्म लाइफ ऑफ पाई को ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आ‌र्ट्स अवा‌र्ड्स (बॉफ्टा) के लिए नामांकित किया गया।

शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

Current Affairs GK Jan. 2013

जनवरी करेंट अफेयर्स 2013.....जनवरी करेंट अफेयर्स 2013>>
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>>केन्द्रीय चुनाव आयोग ने पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा, मेघालय और नागालेंड में विधान सभा चुनाव 11 जनवरी 2013 को करवाने का निर्णय लिया, जिसके तहत 14 फरवरी को मेघालय और 23 फरवरी को नागालेंड में चुनाव होंगे।

>>पद्मभूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित आयुर्वेदाचार्य और नाड़ी वैद्य बृहस्पति देव त्रिगुणा का 1 जनवरी 2013 को निधन हो गया। ये केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद के निदेशक और राष्ट्रीय आयुर्वेद अकादमी के अध्यक्ष भी रह चुके थे।

>>केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने अश्विनी कुमार को नूपुर मित्रा के स्थान पर देना बैंक का अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक 1 जनवरी 2013 को बनाया ।

>>एयर मार्शल रवि बुरली ने 1 जनवरी 2013 को वायुसेना अकादमी (हैदराबाद) के प्रमुख का पद संभाला।

>>30 दिसंबर 2013 को भारतीय मूल के स्वास्थ्य विशेषज्ञ एमजी वेंकटेश मन्नार को कनाडा की सरकार ने कनाडा के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “ऑर्डर ऑफ कनाडा” से सम्मानित किया गया।

>>20 दिसंबर 2012 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने पुरातन वस्तुओं के एक प्रदर्शनी का उदघाटन केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच द्वारा किया गया । इस प्रदर्शनी का शीर्षक “ भारत की पुन: खोज: 1961-2011″ है।

>>यह प्रदर्शनी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्षय में आयोजित की गई है, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की स्थापना वर्ष 1861 में की गई थी।

>>टेनिश में विश्व के तीसरे बड़े खिलाड़ी एंडी मरे ने वर्ष 2013 का ब्रिस्बेन इंटरनेशनल टेनिस टूर्नामेंट (पुरुष एकल) का खिताब 6 जनवरी 2013 को जीत लिया ।

>>5 जनवरी 2013 को पूर्व लोकसभा अध्यक्ष व वर्ष 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्याशी पीए संगमा (पूर्णो अगातो संगमा, Purno Agitok Sangma) ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी ) का गठन किया ।

>>सनमीत कौर साहनी कौन बनेगा करोड़पति में पांच करोड़ रुपए जीतने वाली पहली महिला बनी।

>>4 जनवरी 2013 को विराट कोहली को वर्ष 2012 के लिए सिएट इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द ईयर पुरस्कार से नवाजा गया ।

>>अरुणाचल प्रदेश को वर्ष 2010-11 के दौरान अन्न उत्पादन में सबसे अधिक वृद्धि दर प्राप्त करने के लिए कृषि कर्मन पुरस्कार हेतु चयनित किया गया ।




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राजस्थान के लोकवाद्य (Rajasthani Instruments)


राजस्थान के लोकवाद्य
(Rajasthani Instruments)

मानव जीवन संगीत से हमेशा से जुड़ा रहा है। संगीत मानव के विकास के साथ पग-पग पर उपस्थित रहा है। विषण्ण ह्मदय को आह्मलादित एवं निराश मन को प्रतिपल प्रफुल्लित रखने वाले संगीत का अविभाज्य अंग है- विविध-वाद्य यंत्र। इन वाद्यों ने संगीत की प्रभावोत्पादकता को परिवर्धित किया और उसकी संगीतिकता में चार चाँद लगाए हैं। भांति-भाँति के वाद्ययंत्रों के सहयोगी स्वर से संगीत की आर्कषण शक्ति भी विवर्किद्धत हो जाती है।
भारतीय संगीत में मारवाड़ में मारवाड़ के विविध पारंपरिक लोक-वाद्य अपना अनूठा स्थान रखते हैं। मधुरता, सरसता एवं विविधता के कारण आज इन वाद्यों ने राष्ट्रीय ही नहीं, अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम की है। कोई भी संगीत का राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय समारोह या महोत्सव ऐसा नहीं हुआ, जिसमें मरु प्रदेश के इन लोकवाद्यों को प्रतिनिधत्व न मिला है।
मारवाडी लोक-वाद्यों को संगीत की दृष्टि से पॉच भागों में विभाजित किया जा सकता है- यथातत, बितत, सुषिर, अनुब व धन। ताथ वाद्यों में दो प्रकार के वाद्य आते हैं- अनुब व धन।
अनुब में चमडे से मढे वे वाद्य आते हैं, जो डंडे के आधात से बजते हैं। इनमें नगाडा, घूंसा, ढोल, बंब, चंग आदि मुख्य हैं।
लोहा, पीतल व कांसे के बने वाधों को धन वाध कहा जाता है, जिनमें झांझ, मजीरा, करताल, मोरचंगण श्रीमंडल आदि प्रमुख हैं।
तार के वाधों में भी दो भेद हैं- तत और वितत। तत वाद्यों में तार वाले वे साज आते हैं, जो अंगुलियों या मिजराब से बजाते हैं। इनमें जंतर, रवाज, सुरमंडल, चौतारा व इकतारा है। वितत में गज से बजने वाले वाद्य सारंगी, सुकिंरदा, रावणहत्था, चिकारा आदि प्रमुख हैं। सुषिर वाद्यों में फूंक से बजने वाले वाद्य, यथा-सतारा, मुरली, अलगोजा, बांकिया, नागफणी आदि।

उपरोक्त वाद्यों का संक्षिप्त परिचयात्मक विवरण इस प्रकार है-
ताल वाद्य - राजस्थान के ताल वाद्यों में अनुब वाद्यों की बनावट तीन प्रकार की है यथा -
  • वाद्य जिसके एक तरु खाल मढी जाती है तथा दूसरी ओर का भाग खुला रहता है। इन वाद्यों में खंजरी, चंग, डफ आदि प्रमुख हैं।
  • वे वाद्य जिनका घेरा लकडी या लोहे की चादर का बना होता है एवं इनके दाऍ-बाऍ भाग खाल से मढे जाते हैं। जैसे मादल, ढोल, डेरु डमरु आदि।
  • वे वाद्य जिनका ऊपरी भाग खाल से मढा जाता है तथा कटोरीनुमा नीचे का भाग बंद रहता है। इनमें नगाडा, धूंसौं, दमामा, माटा आदि वाद्य आते हैं। इन वाद्यों की बनावट वादन पद्वदि इस प्रकार है -
  • कमटटामक बंब - इसका आकार लोहे की बड़ी कङाही जैसा होता है, जो लोहे की पटियों को जोङ्कर बनाया जाता है। इसका ऊपरी भाग भैंस के चमड़े से मढा जाता है। खाल को चमड़े की तांतों से खींचकर पेंदे में लगी गोल गिङ्गिड़ी लोहे का गोल घेरा से कसा जाता है। अनुब व घन वाद्यों में यह सबसे बडा व भारी होता है। प्राचीन काल में यह रणक्षेत्र एवं दुर्ग की प्राचीर पर बजाया जाता था। इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले लिए लकड़ी के छोटे गाडूलिए का उपयोग किया जाता है। इसे बजाने के लिए वादक लकड़ी के दो डंडे का प्रयोग करते हैं। वर्तमान में इसका प्रचलन लगभग समाप्त हो गया है। इसके वादन के साथ नृत्य व गायन दोनों होते हैं।
  • कुंडी - यह आदिवासी जनजाति का प्रिय वाद्य है, जो पाली, सिरोही एवं मेवा के आदिवासी क्षेत्रों में बजाया जाता है। मिट्टी के छोटे पात्र के उपरी भाग पर बकरे की खाल मढी रहती है। इसका ऊपरी भाग चार-छः इंच तक होता है। कुंडी के उपरी भाग पर एक रस्सी या चमड़े की पटटी लगी रहती है, जिसे वादक गले में डालकर खड़ा होकर बजाता है। वादन के लिए लकड़ी के दो छोटे गुटकों का प्रयोग किया जाता है। आदिवासी नृत्यों के साथ इसका वादन होता है।
  • खंजरी - लकड़ी का छोटा-सा घेरा जिसके एक ओर खाल मढ़ी रहती है। एक हाथ में घेरा तथा दूसरे हाथ से वादन किया जाता है। केवल अंगुलियों और हथेली का भाग काम में लिया जाता है। घेरे पर मढी खाल गोह या बकरी की होती है। कालबेलिया जोगी, गायन व नृत्य में इसका प्रयोग करते हैं। वाद्य के घेरे बडे-छोटे भी होते है। घेरे पर झांझों को भी लगाया जाता है।
  • चंग - एक लकड़ी का गोल घेरा, जो भे या बकरी की खाल से मढ़ा जाता है। एक हाथ में घेरे को थामा जाता है, दूसरे खुले हाथ से बजाया जाता है। थामने वाले हाथ का प्रयोग भी वादन में होता है। एक हाथ से घेरे के किनारे पर तथा दूसरे से मध्यभाग में आघात किया जाता है। इस वाद्य को समान्यतः होलिकोत्सव पर बजाया जाता है।
  • डमरु - यह मुख्य रुप से मदारियों व जादूगरों द्वारा बजाया जाता है। डमरु के मध्य भाग में डोरी बंघी रहती है, जिसके दोनो किनारों पर पत्थर के छोटे टुकड़े बंधे रहते हैं। कलाई के संचालन से ये टुकड़े डमरु के दोनो ओर मढ़ी खाल पर आघात करते हैं।
  •  - लोहे के गोल घेरे पर बकरे की खाल चढी रहती है। यह खाल घेरे पर मढ़ी नहीं जाती, बल्कि चमड़े की बद्धियों से नीचे की तरफ कसी रहती है। इसका वादन चंग की तरफ होता है। अंतर केवल इतना होता है कि चमडे की बद्धियों को ढ़ील व तनाव देकर ऊँचा-नीचा किया जा सकता है।
  • डेरु - यह बङा उमरु जैसा वाद्य है। इसके दोनों ओर चमङा मढ़ा रहता है, जो खोल से काफी ऊपर मेंडल से जुङा रहता है। यह एक पतली और मुड़ी हुई लकड़ी से बजाया जाता है। इस पर एक ही हाथ से आघात किया जाता है तथा दूसरे हाथ से डोरी को दबाकर खाल को कसा या ढीला किया जाता है। इस वाद्य का चुरु, बीकानेर तथा नागौर में अधिक प्रचलन है। मुख्य रुप से माताजी, भैरु जी व गेगा जी की स्तुति पर यह गायी जाती है।
  • ढाक - यह भी डमरु और डेरु से मिलता-जुलता वाद्य है, लेकिन गोलाई व लंबाई डेरु से अधिक होती है। मुख्य रुप से यह वाद्य गु जाति द्वारा गोढां (बगङावतों की लोककथा) गाते समय बजाया जाता है। झालावाङा, कोटा व बूँदी में इस वाद्य का अधिक प्रचलन है। वादक बैठकर दोनो पैरों के पंजो पर रखकर एक भाग पतली डंडी द्वारा तथा दूसरा भाग हाथ की थाप से बजाते है।
  • ढ़ोल - इसका धेरा लोहे की सीघी व पतली परतों को आपस में जोङ्कर बनाया जाता है। परतों (पट्टियों) को आपस में जोङ्ने के लिये लोहे व तांबे की कीलें एक के बाद एक लगाई जाती है। धेरे के दोनो मुँह बकरे की खाल से ढ़के जाते हैं। मढ़े हुए चमड़े को कसरन के लिए डोरी का प्रयोग किया जाता है। ढोल को चढ़ाने और उतारने के लिए डोरी में लोहे या पीतल के छल्ले लगे रहते हैं। ढोल का नर भाग डंडे से तथा मादा भाग हाथ से बजाया जाता है। यह वाद्य संपूर्ण राजस्थान में त्योहार व मांगलिक अवसरों पर बजाया जाता है। राजस्थान में ढोली, मिरासी, सरगरा आदि जातियों के लोग ढोल बजाने का कार्य करते हैं। ढोल विभित्र अवसरों पर अलग-अलग ढंग से बजाया जाता है, यथा- कटक या बाहरु ढोल, घोङ्चिड़ी रौ ढोल, खुङ्का रौ ढोल आदि।
  • ढोलक - यह आम, बीजा, शीशम, सागौन और नीम की लकड़ी से बनता है। लकड़ी को पोला करके दोनों मुखों पर बकरे की खाल डोरियों से कसी रहती है। डोरी में छल्ले रहते हैं, जो ढोलक का स्वर मिलाने में काम आते हैं। यह गायन व नृत्य के साथ बजायी जाती है। यह एक प्रमुख लय वाद्य है।
  • तासा - तासा लोहे या मिट्टी की परात के आकार का होता है। इस पर बकरे की खाल मढ़ी जाती है, जो चमड़े की पटिटयों से कसी रहती है। गले में लटका कर दो पहली लकड़ी की चपटियों से इसे बजाया जाता है।
  • धूंसौ - इसका घेरा आम व फरास की लकड़ी से बनता है। प्राचीन समय में रणक्षेत्र के वाद्य समूह में इसका वादन किया जाता था। कहीं-कहीं बडे-बडे मंदिरों में भी इकसा वादन होता है। इसका ऊपरी भाग भैंस की खाल से मढ. दिया जाता है। इसकों लकड़ी के दो बडे-डंडे से बजाया जाता है।
  • नगाङा - समान प्रकार के दो लोहे के बड़े कटोरे, जिनका ऊपरी भाग भैंस की खाल से मढा जाता है। प्राचीन काल में घोड़े, हाथी या ऊँट पर रख कर राजा की सवारी के आगे बजाया जाता था। यह मुख्य-मुख्य से मंदिरों में बजने वाला वाद्य है। इन पर लकड़ी के दो डंडों से आघात करके ध्वनि उत्पत्र करते हैं।
  • नटों की ढोलक - बेलनाकृत काष्ठ की खोल पर मढा हुआ वाद्य। नट व मादा की पुडियों को दो मोटे डंडे से आधातित किया जाता है। कभी-कभी मादा के लिए हाथ तथा नर के लिए डंडे का प्रयोग किया जात है, जो वक्रता लिए होता है। इसके साथ मुख्यतः बांकिया का वादन भी होता है।
  • पाबूजी के मोटे - मिट्टी के दो बड़े मटकों के मुंह पर चमङा चढाया जाता है। चमड़े को मटके के मुँह की किनारी से चिपकाकर ऊपर डोरी बांध दी जाती है। दोनों माटों को अलग-अलग व्यक्ति बजाते हैं। दोनों माटों में एक नर व एक मादा होता है, तदनुसार दोनों के स्वर भी अलग होते हैं। माटों पर पाबूजी व माता जी के पावड़े गाए जाते है। इनका वादन हथेली व अंगुलियों से किया जाता है। मुख्य रुप से यह वाद्य जयपुर, बीकानेर व नागौर क्षेत्र में बजाया जाता है।
  • भीलों की मादल - मिट्टी का बेलनाकार घेरा, जो कुम्हारों द्वारा बनाया जाता है। घेरे के दोनो मुखों पर हिरण या बकरें की खाल चढाई जाती है। खाल को घेरे से चिपकाकर डोरी से कस दी जाती है, इसमें छल्ले नही लगते। इसका एक भाग हाथ से व दूसरा भाग डंडे से बजाया जाता है। यह वाद्य भील व गरासिया आदिवासी जातियों द्वारा गायन, नृत्य व गवरी लोकनाट्य के साथ बजाया जाता है।
  • रावलों की मादल - काष्ठ खोलकर मढा हुआ वाद्य। राजस्थानी लोकवाद्यों में यही एक ऐसा वाद्य है, जिसपर पखावज की भांति गट्टों का प्रयोग होता है। दोनों ओर की चमड़े की पुङ्यों पर आटा लगाकर, स्वर मिलाया जाता है। नर व मादा भाग हाथ से बजाए जाते हैं। यह वाद्य केवल चारणों के रावल (चाचक) के पास उपलब्ध है।
धन वाद्य - यह वाद्य प्रायः ताल के लिए प्रयोग किए जाते हैं। प्रमुख वाद्यों की बनावट व आकार-प्रकार इस प्रकार है -
  • करताल - आयताकार लकड़ी के बीच में झांझों का फंसाया जाता है। हाथ के अंगूठे में एक तथा अन्य अंगुलियों के साथ पकड़ लिया जाता है और इन्हें परस्पर आधारित करके लय रुपों में बजाया जाता है। मुख्य रुप से भक्ति एवं धार्मिक संगीत में बजाया जाता है। मुख्य रुप से भक्ति एवं धार्मिक संगीत में इसका प्रयोग होता है।
  •       खङ्ताल - शीशम, रोहिङा या खैर की लकड़ी के चार अंगुल चौड़े दस अंगुल लंबे चिकने व पतले चार टुकड़े। यह दोनो हाथों से बजायी जाती है तथा एक हाथ में दो अफकड़े रहते हैं। इसके वादन में कट-कट की ध्वनी निकलती है। लयात्मक धन वाद्य जो मुख्य रुप से जोधपुर, बाडमेंर व जैसलमेंर क्षेत्रों में मांगणयार लंगा जाति के लोग बजाते हैं।
  •      धुरालियो - बांस की आठ-दस अंगुल लंबी व पतली खपच्ची का बना वाद्य। बजाते समय बॉस की खपच्ची को सावधानी पूर्वक छीलकर बीच के पतले भाग से जीभी निकाली जाती है। जीभी के पिछले भाग पर धागा बंधा रहता है। जीभी को दांतों के बीच रखकर मुखरंध्र से वायु देते हुए दूसरे हाथ से धागे को तनाव व ढील (धीरे-धीरे झटके) द्वारा ध्वनि उत्पत्र की जाती है। यहा वाद्य कालबेलिया तथा गरेसिया जाति द्वारा बजाया जाने वाला वाद्य यंत्र है।
  •     झालर - यह मोटी घंटा धातु की गोल थाली सी होती है। इसे डंडे से आघादित किया जाता है। यह आरती के समय मंदिरों में बजाई जाती है।
  •      झांझ - कांसे, तांबे व जस्ते के मिश्रण से बने दो चक्राकार चपटे टुकङों के मध्य भाग में छेद होता है। मध्य भाग के गड्डे के छेद में छोरी लगी रहती है। डोरी में लगे कपड़े के गुटको को हाथ में पकङ्कर परस्पर आधातित करके वादन किया जाता है। यह गायन व नृत्य के साथ बजायी जाती है।
  •      मंजीरा - दो छोटी गहरी गोल मिश्रित धतु की बनी पट्टियॉ। इनका मध्य भाग प्याली के आकार का होता है। मध्य भाग के गड्ढे के छेद में डोरी लगी रहती है। ये दोनों हाथ से बजाए जाते हैं, दोनों हाथ में एक-एक मंजीरा रहता है। परस्पर आघात करने पर ध्वनि निकलती है। मुख्य रुप से भक्ति एवं धर्मिक संगीत में इसका प्रयोग होता है। काम जाति की महिलाएँ मंजीरों की ताल व लय के साथ तेरह ताल जोडती है।
  •      श्री मंडल - कांसे के आठ या दस गोलाकार चपटे टुकङों। रस्सी द्वारा यह टुकड़े अलग-अलग समानान्तर लकडी के स्टैण्ड पर बंधे होते हैं। श्रीमंडल के सभी टुकडे के स्वर अलग-अलग होते हैं। पतली लकड़ी को दो डंडी से आघात करके वादन किया जाता है। राजस्थानी लोक वाद्यों में इसे जलतरंग कहा जा सकता है।
  •      मोरचंग - लोहे के फ्रेम में पक्के लाहे की जीभी होती है। दांतों के बीच दबाकर, मुखरंध्र से वायु देते हुए जीभी को अंगुली से आघादित करते हैं। वादन से लयात्मक स्वर निकलते हैं। यह वाद्य चरवाहों, घुमक्कङों एवं आदिवासियों में विशेष रुप से प्रचलित वाद्य है।
  •      भपंग - तूंबे के पैंदे पर पतली खाल मढी रहती है। खाल के मध्य में छेद करके तांत का तार निकाला जाता है। तांत के ऊपरी सिरे पर लकड़ी का गुटका लगता है। तांबे को बायीं बगल में दबाकर, तार को बाएँ हाथ से तनाव देते हुए दाहिने हाथ की नखवी से प्रहार करने पर लयात्मक ध्वनि निकलती है।
  •      भैरु जी के घुंघरु - बड़े गोलाकार घुंघरु, जो चमड़े की पट्टी पर बंधे रहते हैं। यह पट्टी कमर पर बाँधी जाती है। राजस्थान में इसका प्रयोग भैरु जी के भोपों द्वारा होता है, जो कमर को हिलाकर इन घुंघरुओं से अनुरंजित ध्वनि निकालते हैं तथा साथ में गाते हैं।
  • सुषिर वाद्य - राजस्थान में सुषिर वाद्य काष्ठ व पीतल के बने होते हैं। जिसमें प्रमुख वाद्यों का परिचयात्मक विवरण इस प्रकार है -
  •      अलगोजा - बांस के दस-बारह अंगुल लंबे टुकड़े, जिनके निचले सिरे पर चार छेद होते हैं। दोनों बांसुरियों को मुंह में लेकर दोनों हाथों से बजाई जाती है, एक हाथ में एक-एक बांसुरी रहती है। दोनों बांसुरियों के तीन छेदों पर अंगुलियाँ रहती हैं। यह वाद्य चारवाहों द्वारा कोटा, बूंदी, भरतपुर व अलवर क्षेत्रों में बजाया जाता है।
  •    करणा - पीतल का बना दस-बारह फुट लंबा वाद्य, जो प्राचीन काल में विजय घोष में प्रयुक्त होता था। कुछ मंदिरों में भी इसका वादन होता है। पिछले भाग से होंठ लगाकर फूँक देने पर घ्वनि निकलती है। जोधपरु के मेहरानगढ़ संग्रहालय में रखा करणा वाद्य सर्वाधिक लंबा है।
  •    तुरही - पीतल का बना आठ-दस फुट लंबा वाद्य, जिसका मुख छोटा व आकृति नोंकदार होती है। होंठ लगाकर फुँकने पर तीखी ध्वनि निकलती है। प्राचीन काल में दुर्ग एवं युद्व स्थलों में इसका वादन होता था।
  •   नड़ - कगोर की लगभग एक मीटर लंबी पोली लकड़ी, जिसके निचले सिरे पर चार छेद होते हैं। इसका वादन काफी कठिन है। वादक लंबी सांस खींखकर फेफङों में भरता है, बाद में न में फूँककर इसका वादन होता है। फूँक ठीक उसी प्राकर दी जाती है, जिस प्रकार कांच की शीशी बजायी जाती है। वादन के साथ गायन भी किया जाता है। वा वाद्य जैसलमेर में मुख्य रुप से बजाया जाता है।
  •   नागफणी - सर्पाकार पीतल का सुषिर वाद्य। वाद्य के मुंह पर होठों द्वारा ताकत से फूँक देने पर इसका वादन होता है। साधुओं का यह एक धार्मिक वाद्य है तथा इसमें से घोरात्मक ध्वनि निकलती है।
  •   पूंगी/बीण - तांबे के निचले भाग में बाँस या लकड़ी की दो जड़ी हुई नलियाँ लगी रहती हैं। दोनो नलियों में सरकंडे के पत्ते की रीठ लगाई जाती है। तांबे के ऊपरी सिरे को होठों के बीच रखकर फूँक द्वारा अनुध्वनित किया जाता है।
  •   बांकिया - पीतल का बना तुरही जैसा ही वाद्य, लेकिन इसका अग्र भाग गोल फाबेदार है। होठों के बीच रखरकर फूंक देने पर तुड-तुड ध्वनि निकलती है। यह वाद्य मांगलिक पर्वो पर बजाया जाता है। इसमें स्वरों की संख्या सीमित होती है।
  • मयंक - एक बकरे की संपूर्ण खाल से बना वाद्य, जिसके दो तरु छेद रहते हैं। एक छेद पर नली लगी रहती है, वादक उसे मुंह में लेकर आवश्यकतानुसार हवा भरता है। दूसरे भाग पर दस-बारह अंगुल लंबी लकड़ी की चपटी नली होती है। नली के ऊपरी भाग पर छः तथा नीचे एक छेद होता है। बगल में लेकर धीरे-धीर दबाने से इसका वादन होता है। जोगी जाति के लोग इस पर भजन व कथा गाते हैं।
  •     मुरला/मुरली - दो नालियों को एक लंबित तंबू में लगाकर लगातार स्वांस वादित इस वाद्य यंत्र के तीन भेद हैं: - आगौर, मानसुरी और टांकी। छोटी व पतली तूंबी पर निर्मित टांकी मुरला या मुरली कहलाती है। श्रीकरीम व अल्लादीन लंगा, इस वाद्य के ख्याति प्राप्त कलाकार हैं। बाड़में क्षेत्र में इस वाद्य का अधिक प्रचलन है। इस पर देशी राग-रागनियों की विभिन्न धुने बजायी जाती है।
  •      सतारा - दो बांसुरियों को एक साथ निरंतर स्वांस प्रक्रिया द्वारा बजाया जाता है। एक बांसुरी केवल श्रुति के लिए तथा दूसरी को स्वरात्मक रचना के लिए काम में लिया जाता है। फिर घी ऊब सूख लकड़ी में छेद करके इसे तैयार किया जाता है। दोनों बांसुरियों एक सी लंबाई होने पर पाबा जोड़ी, एक लंबी और एक छोटी होने पर डोढ़ा जोङा एवं अलगोजा नाम से भी जाना जाता है। यह पूर्ण संगीत वाद्य है तथा मुख्य रुप से चरवाहों द्वारा इसका वादन होता है। यह वाद्य मुख्यतया जोधपुर तथा बाड़मेर में बजाया जाता है।
  •     सिंगा - सींग के आकार का पीपत की चछर का बना वाद्य। पिछले भाग में होंठ लगाकर फूँक देने पर बजता है। वस्तुतः यह सींग की अनुक्रम पर बना वाद्य है, जिसका वादन जोगी व साधुओं द्वारा किया जाता है।
  •    सुरगाई-सुरनाई - दीरी का यह वाद्य ऊपर से पहला व आगे से फाबेदार होता है। इसके अनेक रुप राजस्थान मे मिलते हैं। आदिवासी क्षेत्रों में लक्का व अन्य क्षेत्रों में नफीरी व टोटो भी होते हैं। इसपर खजूर या सरकंडे की पत्ती की रीढ लगाई जाती है। जिसे होंठों के बीच रखकर फूँक द्वारा

भारत मे नदी तंत्र



भारत मे नदी तंत्र दो प्रकार का है।
1. हिमालयी नदियाँ
*सिँधु
*गंगा
*ब्रम्हपुत्र
2. गैर हिमालयी नदियाँ

*अरब सागर मेँ गिरने वाली नदियाँ

*बंगाल की खाड़ी मेँ गिरने वाली नदियाँ

आज हम "गैर हिमालयी नदियाँ" की Trick पर चर्चा करेँगे। यह Trick भी मैँने स्वयं बनायी है जो आपको कौनसी नदियाँ "बंगाल की खाडी" तथा "अरब सागर" मेँ गिरती है उसका Confusion हमेशा के लिए समाप्त कर देगी।

यह Trick उन सब मुख्य 9 नदियोँ की है जो "अरब सागर" मेँ गिरती है

*Trick-
"सालू की माँ भानमती सोजा"

Fact- की, मती Silent word है

अब मेँ Trick का सन्धि विच्छेद करता हूँ।

सा+लू=
*सा=साबरमती
*लू=लूनी

की=Silent word

माँ-
*माँ=माँडवी
*मा=माही

भा+न+मती=
*भा=भारतपुझा/ पोन्नानी नदी (केरल की सबसे लंबी नदी)
*न=नर्मदा
*मती=Silent word

सो+जा=
*सो=सोम
*जा=जाखम, जवाई

1. साबरमती
2. लूनी
3. माँडवी
4. माही
5. भारतपुझा या पोन्नानी
6. नर्मदा
7. सोम
8. जाखम
9. जवाई

यह सभी 9 नदियाँ "अरब सागर" मेँ जाकर गिरती है और इनके अलावा जो भी "गैर हिमालयी नदियाँ" बची है वह सभी बंगाल की खाड़ी मेँ जाकर गिरती है।


"बंगाल की खाड़ी" मेँ गिरने वाली मुख्य 8 नदियाँ है।
1. स्वर्ण रेखा
2. ब्राह्माणी
3. महानदी
4. गोदावरी
5. कृष्णा
6. पेन्नार
7. कावेरी
8. वैगाई




घरेलु उपचार सम्बंधित देशी नुस्खे जानने के लिए यहाँ क्लिक करें 




Photo: भारत मे नदी तंत्र दो प्रकार का है। 
1. हिमालयी नदियाँ
*सिँधु
*गंगा
*ब्रम्हपुत्र
2. गैर हिमालयी नदियाँ

*अरब सागर मेँ गिरने वाली नदियाँ

*बंगाल की खाड़ी मेँ गिरने वाली नदियाँ

आज हम "गैर हिमालयी नदियाँ" की Trick पर चर्चा करेँगे। यह Trick भी मैँने स्वयं बनायी है जो आपको कौनसी नदियाँ  "बंगाल की खाडी" तथा  "अरब सागर"  मेँ गिरती है उसका Confusion हमेशा के लिए समाप्त कर देगी।

यह Trick उन सब मुख्य 9 नदियोँ की है जो "अरब सागर" मेँ गिरती है

*Trick-
"सालू की माँ भानमती सोजा"

Fact- की, मती Silent word है

अब मेँ Trick का सन्धि विच्छेद करता हूँ।

सा+लू= 
*सा=साबरमती
*लू=लूनी

की=Silent word

माँ-
*माँ=माँडवी
*मा=माही

भा+न+मती=
*भा=भारतपुझा/ पोन्नानी नदी (केरल की सबसे लंबी नदी)
*न=नर्मदा
*मती=Silent word

सो+जा=
*सो=सोम
*जा=जाखम, जवाई

1. साबरमती
2. लूनी
3. माँडवी
4. माही
5. भारतपुझा या पोन्नानी
6. नर्मदा
7. सोम
8. जाखम
9. जवाई

यह सभी 9 नदियाँ "अरब सागर" मेँ जाकर गिरती है और इनके अलावा जो भी "गैर हिमालयी नदियाँ" बची है वह सभी बंगाल की खाड़ी मेँ जाकर गिरती है।


"बंगाल की खाड़ी" मेँ गिरने वाली मुख्य 8 नदियाँ है।
1. स्वर्ण रेखा
2. ब्राह्माणी
3. महानदी
4. गोदावरी
5. कृष्णा
6. पेन्नार
7. कावेरी
8. वैगाई

Computer Knowledge For RSCIT Exam

Abacus: Abacus गणना करने के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला अति प्राचीन यंत्र जिससे अंकों को जोड़ा व घटाया दोनों जाता है। 
Accessory: यह प्रोसेसिंग के लिए एक आवश्यक संसाधन होते हैं जिन्हें सहायक यन्त्र भी कहा जाता है। जैसे- वेब कैमरा, फ्लापी डिस्क, स्कैनर, पेन ड्राइव आदि
Access Control: सूचना और संसाधनों की की सुरक्षा के लिए प्रयुक्त की गई विधि जिसके द्वारा अनाधिकृत यूजर को सूचना और निर्देशों को पहुंचने से रोकता है।
Access Time: यूजर द्वारा मेमोरी से डाटा प्राप्त करने के लिए दिए गए निर्देश और डाटा प्राप्त होने तक के बीच के समय को Access time कहते हैं।
Accumulator: एक प्रकार का रजिस्टर जो प्रोसेसिंग के दौरान डाटा और निर्देशों को संग्रहीत करता है।
Active Device: वह उपकरण है जिसमें कोई कार्य वैद्युत् प्रवाह द्वारा सम्पादित किया जाता है।
Active Cell: MS Excel में प्रयोग होने वाला वह खाना है, जिसमें यूजर डाटा लिखता है।
Active Window: कम्प्यूटर में उपस्थित वह विंडो, जो यूजर द्वारा वर्तमान समय में सक्रिय है।
Adapter: दो या दो से अधिक उपकरणों या संसाधनों के बीच सामंजस्य बनाने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली युक्ति।
Adder : एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, जिसके द्वारा दो या दो से अधिक संख्याओं को जोड़ा जा सकता है।
Address: वह पहचान चिन्ह जिसके द्वारा डाटा की स्थिति का पता चलता है।
Algorithm: कम्प्यूटर को दिया जाने वाला अनुदेशों का वह क्रम जिसके द्वारा किसी कार्य को पूरा किया जाता है।
Alignment: डाटा में पैराग्राफ को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया।
Alphanumeric: (A-Z) तक के अक्षरों और (0-9) अंकों के समूह को Alphanumeric कहते हैं।
Analog: भौतिक राशि की वह मात्रा जो लगातार तरंगीय रूप में परिवर्तित होती है।
Analog Computer: जिस कम्प्यूटर में डाटा भौतिकीय रूप से प्रयुक्त किया जाता है।
Antivirus: कम्प्यूटर का दोषपूर्ण प्रोग्राम अथवा 1द्बह्म्ह्वह्य से होने वाली क्षति को बचाने वाला प्रोग्राम।
Application Software: किसी विशेष कार्य के लिए बनाए गए एक या एक से अधिक प्रोग्रामों का समूह।
Artificial Intelligence: मानव की तरह सोचने, समझने और तर्क करने की क्षमता के विकास को कम्प्यूटर में Artificial Intelligence कहते हैं।
ASCII (American Standard Code For Information Interchange): वह कोड जिसके द्वारा अक्षरों तथा संख्याओं को 8 बिट के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
Assembler: वह प्रोग्राम जो असेम्बली भाषा को मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है।
Assembly Language: एक प्रकार की कम्प्यूटर भाषा जिसमें अक्षरों और अंकों को छोटे-छोटे कोड में लिखा जाता है।
Asynchronous: डाटा भेजने की एक पद्घति, जिसमें डाटा को नियमित अन्तराल में अपनी सुविधानुसार भेजा जा सकता है।
Authentication: वह पद्घति, जिसके द्वारा कम्प्यूटर के वैद्यता की पहचान की जाती है।
Auto Cad: एक सॉफ्टवेयर जो रेखा चित्र और ग्राफ स्वत: तैयार करता है।
Audio-Visual: ऐसी सूचना और निर्देश, जिन्हें हम देख सुन सकते हैं पर प्रिंट नहीं निकाल सकते।
Automation: किसी डाटा या सूचना का स्वत: ही प्रोसेस होना।





घरेलु उपचार सम्बंधित देशी नुस्खे जानने के लिए यहाँ क्लिक करें  BASIC: यह एक उच्चस्तरीय, अत्यन्त उपयोगी व सरल भाषा है, जिसका प्रयोग सभी कम्प्यूटरों में होता है। 
Binary: गणना करने के लिए प्रयोग की जाने वाली संख्या प्रणाली। 
4 बिट्स = 1 निबल
8 बिट्स = 1 बाइट
1024 बाइट्स = 1 किलोबाइट (KB) 
1024 किलोबाइट = 1 मेगाबाइट (MB)
1024 मेगाबाइट = 1 गीगाबाइट (GB)
1024 गीगाबाइट = 1 टेराबाइट (TB)
Bit: बाइनरी अंक (0-1) को संयुक्त रूप से बिट कहा जाता है, यह कम्प्यूटर की सबसे छोटी इकाई है। 
Bite: 8 बिटों को सम्मिलित रूप से बाइट कहा जाता है। एक किलोबाइट में 1024 बाइट होती हैं।
Biochop: जैव प्रौद्योगिकी पर आधारित व सिलिकॉन से बनी इस चिप से ही कम्प्यूटर का विकास हो पाया है।
Backbone: कम्प्यूटर नेटवर्क में अन्य कम्प्यूटरों को आपस में जोडऩे वाली मुख्य लाइन।
Background Processing: निम्न प्राथमिकता वाले प्रोग्राम को उच्च प्राथमिकता वाले प्रोग्राम में बदलने की क्रिया।
Back Up: सामान्यत: Back Up कोई भी प्रोग्राम हो सकता है, जिसके द्वारा कम्प्यूटर को खराब होने से बचाया जा सकता है।
Bad Sector: स्टोरेज डिवाइस में वह स्थान जहां पर डाटा लिखा या पढ़ा नहीं जा सकता।
Band Width: डाटा संचरण में प्रयोग की जाने वाली आवृत्ति की उच्चतम और निम्नतम सीमा का अन्तर Band Width कहलाता है।
Base: संख्या पद्वति में अंकों को व्यक्त करने वाले चिन्हों को कहा जाता है।
Batch File: Dos ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रोग्राम की वह फाइल जो स्वंय संपादित होती है।
Band: वह इकाई जो डाटा संचारण की गति को मापता है।
1 Band= 1 Bite/sec
Blinking: किसी बिंदु पर कर्सर की स्थिति को Blinking कहते हैं।
Biometric Device: वह डिवाइस जो दो व्यक्तियों के भौतिक गुणों में अंतर कर सकने में सक्षम हो।
Bernoulli Disk: वह चुम्बकीय डिस्क जो रीड व राइट दोनों में ही सक्षम है, डाटा भण्डारण के लिए प्रयोग की जाती है।
Broad Band: कम्प्यूटर नेटवर्क जिसके संचरण की गति 1 मिलियन बिट्स प्रति सेकेण्ड या इससे अधिक होती है।
Browse: जब इंटरनेट पर किसी वेबसाइट को खोजा जाता है तो उस प्रक्रिया को क्चह्म्श2ह्यद्ग कहते हैं।
Browser: वह साफ्टवेयर जिसके माध्यम से हम इंटरनेट पर अपनी पसंद की वेबसाइट को खोज कर सूचना प्राप्त करते हैं।
Bridge Ware: यह सॉफ्टवेयर हैं जिसके द्वारा कम्प्यूटरों के मध्य सामंजस्य स्थापित किया जाता है।
Bubble Memory: जिसमें डाटा को स्टोर करने के लिए चुम्बकीय माध्यमों का प्रयोग किया जाता है।
Buffer: एक प्रकार की डाटा स्टोरेज डिवाइस है, जो कम्प्यूटर के विभिन्न प्रकार के उपकरणों के बीच डाटा- स्थानन्तरण की गति को एक समान बनाता है।
Burning: वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा क्रह्ररू में डाटा लिखा जाता है।
Bus: एक प्रकार का मार्ग है जो डाटा या इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले कर जाता है।
Blue Tooth: एक लघु रेडियो ट्रांसमीटर होता है जिसके द्वारा सूचनाओं का आदान- प्रदान किया जाता है।
Boot: ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा किया जाने वाला सबसे प्रारम्भिक कार्य क्चशशह्ल कहलाता है।
Bug: यह एक प्रकार का श्वह्म्ह्म्शह्म् होता है, जो कम्प्यूटर में उपस्थित प्रोग्रामों में पाया जाता है। क्चह्वद्द को हटाने की प्रक्रिया को ष्ठद्गड्ढह्वद्द कहा जाता है।


Chip : Chip सामान्यत: सिलिकॉन अथवा अन्य अद्र्घचालकों से बना छोटा टुकड़ा होता है, जिस पर विभिन्न प्रकार के कार्यों को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बने होते हैं।
Computer Program : किसी कार्य को विधिवत तरीके से पूर्ण करने के लिए कई प्रकार के प्रोग्राम बनाये जाते हैं, जिन्हें Computer Program कहा जाता हैं। सामान्यत:
Computer Program विभिन्न प्रकार की सूचनाओं का समूह होता है।
Cyber Space : Cyber Space द्वारा कम्प्यूटर नेटवर्क में उपस्थित सूचनाओं का आदान-प्रदान पूरे विश्व में किया जाता है।
CD-R/W :इसे विस्तृत रूप से Compact Disk - Read/Write कहा जाता है। यह एक Storage Device है। जिसमें डाटा को बार-बार लिखा तथा पढ़ा जा सकता है।
CD-R : इसे विस्तृत रूप से Compact Disk - Recordable कहा जाता है। इस Storage Device में डाटा केवल पढ़ा जा सकता हैं। लेकिन Store डाटा में कोई भी परिवर्तन नहीं
किया जा सकता है।
CD ROM Juke Box : इसे विस्तृत रूप से Compact Disk Read Only Memory Juke Box कहते है। इस Storage Device में अनेक प्रकार की सीडियां, ड्राइव्स, डिस्कस
आदि सम्मिलित होती है।
Cell : Row और Column से निर्मित भाग को Cell कहा जाता है।
CPU : इसका विस्तृत रूप Central Processing Unit Processing हैं। यह कम्प्यूटर में होने वाली सभी क्रियाओं की प्रोसेसिंग करता है। यह कम्प्यूटर का दिमाग कहलाता है।
Character Printer : इसकी विशेषता यह है कि यह एक बार में केवल एक ही कैरेक्टर (जैसे-अंक, अक्षर अथवा कोई भी चिन्ह) प्रिन्ट करता हैं।
Chat : इंटरनेट के द्वारा दूर स्थिर अपने मित्र या सगे-सम्बंधियों से वार्तालाप करना, Chat कहलाता हैं।
Channel Map : वह प्रोग्राम, जो अक्षरों, अंकों के समूह को दर्शाता है, Channel Map कहलाता है।
Check Box : वह प्रोग्राम, जिसके द्वारा किसी कार्य को सक्रिय या निष्क्रिय किया जाता हैं। ये प्रोग्राम विण्डोज के GUI (ग्राफिकल यूजर इंटरफेस) में प्रयुक्त किये जाते हैं।
Cladding : Cladding एक अवरोधक सतह होती है। जोकि प्रकाशीय तन्तु के ऊपर लगायी जाती है।
Click : माउस के बटन को दबाना ''क्लिक" करना कहलाता हैं।
Client Computer : वह कम्प्यूटर, जो नेटवर्क में सर्वर को सेवा प्रदान करता हैं, Client Computer कहलाता है।
Clip Art : कम्प्यूटर में उपस्थित रेखा चित्र का समूह Clip Art : कहलाता है।
Component : यूटलिटी सॉफ्टवेयर के अन्र्तगत प्रयुक्त होने वाले पुर्जे Component कहलाते हैं।
Compile : उच्च स्तरीय तथा निम्न स्तरीय भाषाओं को मशीनी भाषा में बदलना Compile करना कहलाता है।
Compiler : Compiler उच्च स्तरीय भाषा को मशीनी भाषा में बदलने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
Compatible : विभिन्न प्रकार के कम्प्यूटरों को एक-साथ जोड़कर उनमें सामंजस्य बैठाना।
Communication Protocol : कार्य को सरल तथा सुविधाजनक बनाने के लिए कई प्रकार के नियम बनाये जाते हैं, जिन्हें कम्प्यूटर भाषा में Communication Protocol
कहते हैं।
Common Carriers : एक संस्था, जो डाटा संचरण की सुविधा प्रदान करती है।
Command : कम्प्यूटर में किसी कार्य को पूरा करने के लिए जब कोई निर्देश दिया जाता है, तो उसे Command देना कहते हैं।
Cold Fault : कम्प्यूटर पर काम करते-करते अचानक दोष उत्पन्न हो जाना, परन्तु कम्प्यूटर को दोबारा ऑन करने पर दोष का दूर हो जाना Cold Fault कहलाता हैं।
Cold Boot : दिए गए नियमों द्वारा कार्य सम्पन्न करने की विधि Cold Boot कहलाती है।
Coding : प्रोग्रामिंग भाषा में अनुदेशों को लिखने की क्रिया Coding कहलाती है।
Co-axial Cable : एक विशेष तार, जिसे डाटा संचरण के लिए प्रयुक्त किया जाता है। Co-axial Cable में एक केन्द्रीय तार तथा उसके चारों ओर तारों की जाली होती है।
Clock : मदरबोर्ड पर स्थित डिजिटल संकेतों को उत्पन्न करने वाली घड़ी।
Clip Board : Clip Board कम्प्यूटर की मेमोरी में आरक्षित वह स्थान होता हैं, जहां किसी भी कार्य को सम्पन्न करने के लिए निर्देश दिए होते हैं।
Composite Video : इसके द्वारा रंगीन आउटपुट प्राप्त होता है।
Computer : गणना करने वाला एक यन्त्र, जो ह्यद्गह्म् द्वारा प्राप्त निर्देशों की प्रोसेसिंग करके उसका उपयुक्त परिणाम आउटपुट डिवाइस के द्वारा प्रदर्शित करता है।
Computer Aided Desin (CAD) : वह सॉफ्टवेयर, जिसका प्रयोग डिजाइन बनाने अथवा डिजाइनिंग करने के लिए किया जाता है।
Computer Aided Manufacturing (CAM) : वह सॉफ्टवेयर, जिसका प्रयोग प्रबन्धक, नियन्त्रक आदि के कार्यों के लिए किया जाता है।
Computer Jargon : Computer Jargon के द्वारा हम किसी भी क्षेत्र तथा भाषा में प्रयुक्त शब्दों की शब्दावली प्राप्त कर सकते हैं।
Computer Literacy : कम्प्यूटर में होने वाले कार्य तथा उन्हें करने का ज्ञान होना Computer Literacy कहलाता है।
Computer Network : दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को एक साथ जोड़कर बनाये जाने वाले यन्त्र को Computer Network कहते हैं।
Computer System : उपकरणों का समूह (जैसे - मॉनीटर, माउस, की-बोर्ड आदि) Computer System कहलाता है।
Console : Console एक प्रकार का टर्मिनल हैं, जो मुख्य कम्प्यूटर से जुड़ा होता है तथा कम्प्यूटर में होने वाले कार्यों पर नियन्त्रण रखता है।
Control Panel : Control Panel एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसके ऊपर बहुत-से बटन लगे होते हैं। इसके द्वारा कार्य का दिशा- निर्देशन होता है।
Cylinder : Cylinder दो या दो से अधिक ट्रैकों का समूह होता है।
Cut : मॉनीटर पर उपस्थित डाटा को डिलीट करने के लिए प्रयुक्त कमाण्ड।
Cursor Control Key : यह की-बोर्ड में Cursor को नियंत्रित करने के लिए प्रयुक्त Key है। माउस खराब हो जाने पर इस Key का प्रयोग मुख्य रूप से किया जाता है।
Cryptography : किसी डाटा तथा निर्देशों को Password के द्वारा संरक्षित कर देने तथा आवश्यकता पडऩे पर पुन: Save किये गये डाटा तथा निर्देश को प्राप्त करने की प्रक्रिया को
Cryptographyकहा जाता है।
Corel Draw : डिजाइन तैयार करने के लिए प्रयोग किये जाने वाले सॉफ्टवेयर को Corel Draw कहा जाता हैं। इसका प्रयोग मुख्यत: DTP (डेस्कटॉप पब्लिशिंग) के लिये किया
जाता है।
CD-ROM : यह भण्डारण युक्ति है, जो कि प्लास्टिक की बनी होती है तथा इसमें डाटा लेजर बीम की सहायता से स्टोर किया जाता है। इसकी भण्डारण क्षमता 700 MB (80 मिनट)
होती है।
Cursor : टेक्स्ट लिखते समय कम्प्यूटर स्क्रीन पर “Blink” करने वाली खड़ी रेखा को Cursor कहते है।




CAD- Computer-Aided Design

CC- Carbon Copy

CCD - Charged Coupled Device

CD- Compact Disc

CD-R- Compact Disc Recordable

CD-ROM- Compact Disc Read-Only Memory

CD-RW- Compact Disc Re-Writable

CDFS- Compact Disc File System

CDMA- Code Division Multiple Access

CGI- Common Gateway Interface
Photo: CAD- Computer-Aided Design 

CC- Carbon Copy

CCD - Charged Coupled Device

CD- Compact Disc

CD-R- Compact Disc Recordable

CD-ROM- Compact Disc Read-Only Memory 

CD-RW- Compact Disc Re-Writable

CDFS- Compact Disc File System

CDMA- Code Division Multiple Access

CGI- Common Gateway Interface






Data: निर्देश तथा सूचनायें, जिन्हें कम्प्यूटर में स्टोर या अन्य कार्यों को करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
Database : बहुत-सी सूचनाओं का संग्रह Database कहलाता है। Database के द्वारा वांछित सूचना को कम्प्यूटर की स्क्रीन पर प्राप्त किया जा सकता है।
Data Base Management System (DBMS): DBMS बहुत से प्रोग्रामों का समूह होता है। जिसके द्वारा डाटा को व्यवस्थित करने, सूचना देने अथवा उसमें परिवर्तन करने
आदि कार्य सरलतापूर्वक किये जाते हैं।
Data Entry : डाटा तथा निर्देशों को कम्प्यूटर में संगृहित करना Data Entry कहलाता है।
Data Processing : डाटा तथा निर्देशों को आवश्यकतानुसार प्रयोग में लाकर आउटपुट प्राप्त करना अथवा डाटा को व्यवस्थित करना Data Processing कहलाता है।
Data Redundancy : एक फाइल, एक या एक से अधिक बार अलग-अलग नामों से कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर में Save करना Data Redundancy कहलाता है।
Data Transfer Rate : यूजर द्वारा दिए गए डाटा तथा निर्देशों को सहायक मेमोरी से मुख्य मेमोरी अथवा एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में पहुंचाने की दर को Data Transfer
Rate (डाटा स्थानान्तरण दर) कहते हैं।
Daughter Board : Main Board के साथ जुडऩे वाला सहायक Board Daughter Board कहलाता है। Daughter Board एक सर्किट बोर्ड होता है।
Debugging : दिए गए डाटा तथा प्रोग्राम में गलतियों को ढूंढऩे तथा उन्हें सुधारने की क्रिया Debugging कहलाती है।
Debugger : Debugging को प्रयोग करने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले सॉफ्टवेयर Debugger कहलाते हैं।
Decision Box : Decision Box का फ्लोचार्ट बनाने में किया जाता है। इसके अन्तर्गत दो Condition होती हैं - 1 हां, 2 व ना, जिनमें से एक Condition को चुनना होता है।
यह फ्लोचार्ट के मध्य में प्रयोग किया जाता है।
Decision Logic : किसी डाटा या प्रोग्राम में दो या अधिक विकल्पों को चुनना Decision Logic कहलाता है।
Decoder : यह Device कम्प्यूटर को दिये डाटा को पढ़कर उनकी प्रोसेसिंग के लिए स्वत: ही निर्देश देती है।
Dedicated Line : यह प्राइवेट टेलीफोन लाइन होती है, जो ध्वनि/डाटा के स्थानान्तरण के लिए प्रयोग की जाती है।
Delete : किसी सॉफ्टवेयर में उपस्थित डाटा में से अवांछित डाटा को हटाना।
Demodulation : इसके द्वारा मॉडुलेट किए गए डाटा माध्यम से अलग किये जाते हैं, जिससे उस डाटा का पुन: प्रयोग किया जा सके। Demodulation के द्वारा एनालॉग क्रिया को
डिजिटल में परिवर्तित किया जा सकता है।
Desk Top : कम्प्यूटर को ऑन करने के तुरन्त बाद कम्प्यूटर स्क्रीन पर दिखायी देने वाला आउटपुट Desk top कहलाता है।
Desk Top Publishing (DTP) : यह एक एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर है। जिसका प्रयोग आमतौर पर प्रकाशन कार्यों में किया जाता है।
Dialogue Box : इसका प्रयोग कम्प्यूटर तथा यूजर के मध्य संवाद करने के लिए किया जाता है। Dialogue Box विण्डोज सॉफ्टवेयर में प्रयोग किया जाता है।
Dial Up Line : वह लाइन, जिसके द्वारा संचार व्यवस्था स्थापित की जाती है, Dial Up Line कहलाती है।
Digit : कोई भी अंक, चिन्ह, जिसका प्रयोग संख्या पद्घति में किया जाता है।
Digital Computer : इन कम्प्यूटरों में इलेक्ट्रॉनिक संकेतों का प्रयोग किया जाता है। आधुनिक युग में प्रयुक्त कम्प्यूटर Digital Computer ही है।
Digital Signal : इसके द्वारा निर्देशों तथा डाटा को बाइनरी संख्या पद्घति में परिवर्तित किया जाता है।
Digital Video Disk : यह एक भण्डारण युक्ति है। जिसमें सूचनाओं को पढऩे तथा लिखने के लिए लेजर किरणों का प्रयोग किया जाता है। जिस कारण इसे प्रकाशीय डिस्क भी कहते
हैं।
Digitiser : रेखीय डाटा को अंकीय रूप में परिवर्तित करने के लिए Digitiser का प्रयोग किया जाता है।
Disc : एक वृत्त के आकार का यंत्र, जिसका प्रयोग डाटा तथा निर्देशों को सूचनाओं के रूप में संग्रहीत करने के लिए किया जाता है।
Disk Array : हार्ड डिस्क के बहुत से समूह, उनके नियंत्रक तथा ड्राइव को सम्मिलित रूप से Disk Array कहते हैं। सम्मिलित समूह के कारण इसकी संग्रह क्षमता अत्यधिक होती है। Disk Array को RAID (रेड) भी कहा जाता है।
Disk Drive : वह डिस्क, जिसके द्वारा संगृहित डाटा पढ़ा व लिखा जा सकता है, Disk Drive कहलाता है।
Diskette : फ्लॉपी डिस्क को ही Diskette कहा जाता है। यह एक पतली, लोचदार चुम्बकीय डिस्क है। जिसे डाटा भण्डारण के लिए प्रयोग किया जाता है।
Disk Operating System (DOS): वह ऑपरेटिंग सिस्टम जिसके द्वारा कम्प्यूटर को Boot किया जाता है तथा कम्प्यूटर का नियन्त्रण किया जाता है, Disk Operating
System कहलाता है।
Disk Pack : दो या अधिक चुम्बकीय डिस्क का समूह, जिसेशॉफ्ट (Shaft) पर लगाकर, भण्डारण युक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है।
Display Unit : यह एक आउटपुट डिवाइस है। जिसे मॉनीटर भी कहा जाता है। यह अपनी स्क्रीन पर डाटा और परिणामों को प्रदर्शित करता है।
Domain Name : वह विशिष्ट नाम, जो सामान्य नियमों तथा प्रक्रियाओं द्वारा इंटरनेट पर किसी वेबसाइट का नाम बताता है।
Dots Per Inch (DPI) : Dot Printers में DPI का प्रयोग आवश्यक रूप से किया जाता है। ये प्रति एक इंच में उपस्थित बिन्दुओं की संख्या है, जो ऊध्र्वाधर तथा क्षैतिज रूप में
होती है।
Dot Pitch : कम्प्यूटर की स्क्रीन पर एक मिलीमीटर के क्षेत्र में उपस्थित कुल बिन्दुओं की संख्या को Dot Pitch कहते है।
Downloading : कम्प्यूटर नेटवर्क के प्रयोग से डाटा तथा फाइल को दूरस्थ कम्प्यूटर से स्थानीय कम्प्यूटर में लाने की क्रिया Downloading कहलाती है।
Drag : माउस द्वारा डाटा के किसी भाग को सेलेक्ट करके एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित करने की क्रिया Drag कहलाती है।
Dumb terminal : वह टर्मिनल, जिसकी स्वत: प्रोसेसिंग नहीं होती, बल्कि सहायक Terminals के द्वारा इसकी प्रोसेसिंग की जाती है।
 

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