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बुधवार, 2 मई 2018

राजस्थान में 1857 की क्रांति,Revolution of 1857 in Rajasthan

राजस्थान में 1857 की क्रांति 


व्याख्या -- 1857 की क्रांति राजस्थान में 28 मई 1857 को नसीराबाद से प्रारम्भ हुई इसका नेतृत्व अमर चंद बाठिया ने प्रारम्भ किया इन्हे राजस्थान का मंगल पण्डे कहा जाता है राजस्थान का प्रथम अंग्रेज पोलिटिकल अंग्रेज मि. लॉकेट था राजस्थान में सहायक संधि का जन्मदाता लार्ड वेलेजली था इस संधि को स्वीकार करने वाली पहली रियासत अलवर थी 1803 में यहां के प्रशासक बख्तावरसिंह ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया आक्षित पार्थक्य को स्वीकार करने वाली प्रथम रियासत करोली थी यहां के शासक हरबख्शपाल सिंह थे जबकि अंतिम रियासत सिरोही थी यहां के प्रशासक महाराज शिव सिंह थे सबसे बड़ी छावनी नसीराबाद थी खेरवाड़ व ब्यावर नामक सैनिक छावनी ने क्रांति में हिस्सा नहीं लिया राजस्थान में राजपुताना रेजिडेंट की स्थापना 1832 में अजमेर में हुई 1857 की क्रांति के समय राजस्थान का प्रमुख ए.जी.जी.जॉर्ज पेट्रिक लोरेंज था

प्रमुख तथ्य -- 
1.मराठा व पिण्डारियों के आतंक से मुक्ति पाने का प्रथम पैगाम सहायक संधि के रूप में 1803 में लार्ड वेलेजली लाया
2.सवाई जय सिंह ने मराठाओ की समस्या का निदान करने के लिए 17 जुलाई 1734 के हुरड़ा सम्मेलन बुलाया गया इस सम्मेलन की अध्य्क्षता सवाई जय सिंह दिव्तीय ने की थी
3.राजस्थान की सबसे बड़ी छावनी नसीराबाद थी
4.मेजर बर्टन कोटा के पोलिटिकल एजेंट थे
5.मेहराब खा ने कोटा के शासक दिव्तीय को छ: माह तक़ कोटा दुर्ग में बंदी रखा
6.भरतपुर में विद्रोह 31 मई 1857 को हुआ
7. 8  अगस्त 1857 को तांत्या टोपे ने भीलवाड़ा से राजस्थान में प्रवेश किया
8. तांत्या टोपे ने कुंवाडा नामक स्थान पर जनरल रॉबर्ट को परास्त किया
9. 11  सितम्बर 1857 को बांसवाड़ा में प्रवेश किया
10.मानसिंह नरुका ने तांत्या टोपे को धोखा दिया
11.7 अप्रैल 1859 को तांत्या टोपे को फांसी दी गई


   

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